Processed Food: आज कल बाहर की चीजें खाना लगभग हर व्यक्ति को पसंद है। कुछ लोग स्वाद के लिए खाते हैं तो कुछ लोग खाना बनाने से बचने के लिए खाते हैं। घर से बाहर रहने वाले लोगों का जीवन ही जंक फूड खाकर बीत रहा है। लेकिन उन्हें ये नहीं पता की ये खाना उनके लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। हाल ही में अमेरिका में प्रोसेस्ड फूड को लेकर एक रिसर्च किया गया था। यह रिसर्च 43 सालों तक चला था, जिसमें लगभग 1 लाख 30 हजार लोगों को शामिल किया गया था। इस रिसर्च इस बात का खुलासा हुआ कि जो लोग अधिक मात्रा में जंक फूड खाते हैं उन लोगों को गंभीर डिमेंशिया का खतरा अधिक था। डिमेंशिया कौन सी बीमारी है और कैसे होती है आइए जानते हैं।
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दरअसल, डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके शिकार लोगों की याददाश्त, रीजनिंग पॉवर, भाषा के साथ ही सोचने की क्षमता में कमी आने लगती है। लेकिन जो लोग प्रोसेस्ड फूड (पिज्जा, बर्गर, फ्राइज, पैक्ड चिप्स, चाट, समोसा, कचौरी, रेड मीट, बेकन, हॉट डॉग्स, सॉसेज इत्यादि) से दूरी बनाकर रखते हैं, वो इस बीमारी से भी दूर रहते हैं। अमेरिका में होने वाले इस रिसर्च की बीत करें तो इसमें 1,30,000 से अधिक लोगों पर 43 वर्षों तक अध्ययन किया गया था। स्टडी में शामिल हुए सभी पार्टिसिपेंट्स में से आठ प्रतिशत से अधिक में डिमेंशिया विकसित हुआ था। स्टडी ने पाया कि नियमित रूप से खाने वाले रेड मीट से डिमेंशिया विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है।
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इसके अलावा रेड मीट हफ्ते में दो बार खाने वालों को तीन से कम बार खाने वालों की तुलना में डिमेंशिया का 14% अधिक जोखिम है। रोजाना रेड मीट की जगह नट्स, बीन्स या टोफू खाने से डिमेंशिया का खतरा 20% तक कम हो सकता है। चिप्स, आइसक्रीम, सूप और प्रोसेस्ड रेड मीट भी बहुत प्रोसेस्ड होते हैं, जो मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारी का कारण हो सकता है। रिसर्चर्स ने पाया कि हर दिन रेड मीट खाने से ब्रेन और शरीर के अंगों में कमजोरी आती है। याद करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। प्रोसेस्ड रेड मीट में मौजूद सैचुरेटेड फैट, सोडियम, आयरन और नाइट्राइट से स्ट्रोक, क्रॉनिक इंफ्लेमेशन, उच्च रक्तचाप और नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
