केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव: सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई सिर्फ़ डीप फेक सामग्री तक ही सीमित

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सेंसरशिप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने की सरकार की कार्रवाई सिर्फ ‘डीप फेक’ सामग्री तक ही सीमित है और वास्तविक सामग्री बनाने पर कोई रोक-टोक नहीं है।

हाल ही में, यूट्यूब-आधारित चैनलों के ऑनलाइन वीडियो हटाए जाने को लेकर कई दावे किए गए हैं। ऑनलाइन आंदोलन से जुड़े ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता अभिजीत दीपके ने भी दावा किया है कि सीबीएसई के गलत मूल्यांकन से प्रभावित एक पीड़ित के समर्थन में बनाया गया उनका वीडियो सरकार के कहने पर हटा दिया गया था।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन दावों को गलत बताया कि सोशल मीडिया मंच से विरोध प्रदर्शन के असली वीडियो हटाए जा रहे हैं। वैष्णव ने कहा, “बिल्कुल नहीं। ये फेक वीडियो जहां भी हों, ये हमारी और सरकार की जिम्मेदारी है कि अगर कोई डीप फेक वीडियो गलत या झूठी खबर फैला रहा है, तो उसे हटाया जाए।”

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “समाज संस्थानों के बीच भरोसे पर टिका है और इस बात पर जोर दिया कि इस भरोसे को मजबूत किया जाना चाहिए। भरोसा मजबूत करने के लिए-यानी आप जो देखते हैं उस पर यकीन करने के लिए, वो सच है या झूठ, असली है या डीपफेक-उस यकीन को अलग-अलग तकनीकी तरीकों से मजबूत करना जरूरी है और हम यही कर रहे हैं। अगर प्रति व्यक्ति कंटेंट बनाने की बात करें, तो डीपफेक वाला कंटेंट कुल बनने वाले कंटेंट का बहुत छोटा सा हिस्सा है, लेकिन ये उस समाज के लिए नुकसानदायक है जो इसे बना रहा है।”

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वैष्णव ने कहा कि सरकार का मानना है कि फर्जी और गलत जानकारी के बारे में एक नए कानून की जरूरत है और वो इस पर उद्योग के साथ मिलकर काम करेगी। सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि गलत खबरों को हटाने की जरूरत है, चाहे उसे कोई भी फैला रहा हो। इस संशोधन से सूचना और प्रसारण मंत्रालय की निगरानी व्यवस्था और कंटेंट को ब्लॉक या हटाने की शक्तियां उन उपयोगकर्ताओं तक भी बढ़ जाती हैं, जो प्रकाशक के तौर पर पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन ऑनलाइन समाचार और समसामयिक मामलों से जुड़ी सामग्री पोस्ट या साझा करते हैं।

वैष्णव ने ये भी कहा कि, “सवाल बहुत सीधा है। क्या सोशल मीडिया पर फेक न्यूज को रहने देना चाहिए या नहीं? फेक न्यूज कौन बनाता है, ये कभी चर्चा का विषय नहीं रहा। गलत समाचार कौन बनाता है, ये कभी चर्चा का विषय नहीं रहा। चाहे गलत समाचार किसी अखबार ने बनाया हो या किसी और व्यक्ति ने, अगर वो खबर गलत है, तो उसे हटाना ही चाहिए।”

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