भीषण गर्मी के मौसम में ‘सत्तू’ ( सतुआ ) का सेवन शरीर के लिए एक वरदान की तरह काम करता है। यह भुने हुए चने या जौ को पीसकर बनाया जाने वाला एक पारंपरिक भारतीय सुपरफूड है। सत्तू की तासीर स्वाभाविक रूप से बेहद ठंडी होती है। पानी में घोलकर पीने पर यह शरीर के आंतरिक तापमान को तुरंत कम करता है। इसका सेवन शरीर के लिए काफी स्वास्थ्यवर्धक है।
सत्तू का सेवन भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में यह शरीर की रक्षा करता है। सत्तू की तासीर स्वाभाविक रूप से बेहद ठंडी होती है। घर से बाहर निकलने से पहले सत्तू का शरबत पीने से लू लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके अलावा सत्तू को आप आटे की तरह गूंथकर इसे अपनी पसंद व स्वाद के अनुसार मीठा या नमकीन कर सकते हैं। फिर इसके पेड़े से बनाकर छाछ के साथ भी ले सकते हैं, जोकि बेहद स्वादिष्ट लगता है।
मीठे शरबत के रूप में सत्तू को ठंडे पानी, गुड़ और थोड़े से नींबू के रस के साथ मिलाकर पी सकते हैं। या फिर नमकीन शरबत के रूप में सत्तू में पानी, काला नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर, पुदीना और बारीक कटा हुआ प्याज मिलाकर सेवन कर सकते हैं। सत्तू भी कई प्रकार के होते हैं, जैसे- चने का सत्तू, जौ का सत्तू, जौ-चना का मिक्स सत्तू, मकई का सत्तू, गेहूं-चना का सत्तू और मल्टीग्रेन सत्तू।
सत्तू में कार्बोहाइड्रेट और उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है। थकावट और कमजोरी महसूस होने पर इसका घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा से भर देता है। सत्तू में प्रचुर मात्रा में अघुलनशील फाइबर पाया जाता है। यह पेट को साफ रखता है, कब्ज को दूर करता है और एसिडिटी से भी राहत दिलाता है। इसके सेवन की खास बात ये है कि इसे पीने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। यही नहीं यह बार-बार होने वाली फूड क्रेविंग्स को रोकता है, जिससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है।
इसके अलावा सत्तू के काफी फायदे हैं। सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है। यह अचानक से ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देता, जो मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत अच्छा है।
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