Delhi: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को भी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी पर “बहुत दुख और अफसोस” है, लेकिन उन्होंने मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए इसे “जरूरी” बताया।घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत में प्रति सिलेंडर 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
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तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, क्योंकि सरकारी ईंधन कंपनियां वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं।जोशी ने कहा, “हमें भी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी पर बहुत दुख और अफसोस है, लेकिन आलोचना करने से पहले सभी को दुनिया भर के हालात समझने चाहिए। दुनिया बहुत गंभीर संकटों से जूझ रही है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “कोई ट्रांसशिपमेंट (एक जगह से दूसरी जगह सामान ले जाना) नहीं हो रहा है और एलपीजी बहुत सीमित स्रोतों से ही उपलब्ध है।मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि एलपीजी और पेट्रोल/डीजल उपभोक्ताओं को कोई परेशानी न हो और इसके लिए खरीद के स्रोतों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ऐसे देशों से खरीद की जा रही है, जो भारत से काफी दूर हैं।
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उन्होंने आगे कहा, “ट्रांसपोर्टेशन की लागत अधिक है, बेस कॉस्ट भी अधिक है और 40-45 दिनों के ट्रांसशिपमेंट के कारण बीमा लागत भी बढ़ गई है। इसलिए हम भी आम आदमी को लेकर उतने ही चिंतित हैं, लेकिन साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी है।ये बढ़ोतरी सात मार्च को प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद हुई है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ गईं।
ताजा बदलाव से पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियों को बेचे जाने वाले प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था।केंद्र सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट (जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ था) के कारण अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस के लिए दुनिया में सबसे कम कीमतें चुकाई जा रही हैं।
सरकार ने एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है।भारत की एलपीजी आयात लागत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सीपी) से जुड़ी है, जो इस ईंधन के लिए वैश्विक बेंचमार्क है। इसमें कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी रुकावटों के कारण खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई कम होने के बाद से बेंचमार्क में फरवरी के बाद से लगभग 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
