अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह ने CJP के प्रदर्शन का समर्थन कर पुलिस कार्रवाई की निंदा की

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने बुधवार को एक कड़े बयान में कहा कि उनका दिल दुख रहा है और नकाबपोश “गुंडों” द्वारा युवाओं के साथ किए गए अन्याय से वे बेहद आक्रोशित हैं, जो उन्हें अमेरिकी आईईसी एजेंटों की याद दिलाते हैं। शाह ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक भावुक वीडियो में कहा, “सब याद रखा जाएगा” और छात्रों से अपना संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

यह वीडियो शहर में पुलिस द्वारा हजारों लोगों, जिनमें ज्यादातर छात्र थे, पर की गई कार्रवाई के दो दिन बाद आया है। ये लोग ‘चलो संसद’ के आह्वान पर राजधानी की सड़कों पर उतरे थे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ अपना विरोध जता रहे थे। उनकी पत्नी और अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह ने भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि वे छात्रों के साथ खड़े रहने के लिए तैयार हैं, जब भी वे उन्हें बुलाएंगे।

सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से अपना संघर्ष जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “इस समय मेरा दिल दुख रहा है और मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है कि कैसे हमारे बच्चों के साथ ये गुंडे अन्याय कर रहे हैं, जो मुझे नकाबपोश और लाठी लिए अमेरिकी आईईसी एजेंटों की याद दिलाते हैं। कभी-कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचो और जान लो कि एक दिन तुम्हें भी अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा।”

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76 वर्षीय नसीरुद्दीन शाह ने बताया कि उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय के दो अलग-अलग कोर्स पूरे किए हैं और हमेशा छात्रों को अपना सर्वश्रेष्ठ शिक्षक माना है।

रत्ना पाठक शाह ने कहा कि “बच्चों से मैं कहना चाहती हूं कि हिम्मत मत हारो, बहुतों की सहानुभूति तुम्हारे साथ है। बहुत से लोग तुम्हारे साथ हैं, लड़ते रहो। मुझे हमेशा से अपने देश के युवाओं से उम्मीद रही है और अब यह और भी मजबूत हो गई है। तुम अपनी लड़ाई लड़ते रहो, हम सब तुम्हारे साथ हैं। और इस देश के शासकों से मैं बस इतना कहना चाहती हूं, ‘सब याद रखा जाएगा”

रत्ना पाठक शाह ने अपनी बात को और भी प्रभावी ढंग से कहने के लिए एकलव्य की वह कहानी सुनाई जो उन्होंने बचपन में सुनी थी। “मैं स्तब्ध रह गई… भला कैसा गुरु अपने बच्चे, अपने शिष्य से उसका पूरा भविष्य मांग सकता है? उस समय मेरे बड़ों ने मुझे समझाया कि कहानी गुरु की नहीं, बल्कि शिष्य की है, उसकी अपने गुरु के प्रति भक्ति, कुछ सीखने की उसकी लगन और उसके बलिदान की। मैं उनसे सहमत तो थी, लेकिन इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाई।

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