क्या कोर्ट के आपराधिक मामले कर सकते हैं ट्रंप की जीत का मजा किरकिरा ?

Donald Trump
Donald Trump: अमेरिका में 6 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे सामने आए। जिसमें डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिद्वंदी कमला हैरिस को हराकर जीत हासिल की। अमेरिका में इतिहास रचते हुए डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) दूसरी बार राष्ट्रपति का ताज अपने सिर पर सजाएंगे। जीत के बाद इनके प्रशंसकों ने नाच गाकर और झुमकर अपनी जीत की खुशी जाहिर की। ट्रंप 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। ऐसे में देखना यह होगा कि कोर्ट में चल रहे मामले क्या ट्रंप की जीत का स्वाद खराब कर सकते हैं ?

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क्या है पूरा मामला ?

बता दें, ट्रंप (Donald Trump) पर कोर्ट में 4 अपराधिक मामले चल रहे हैं। जिनमें से एक की सुनवाई 26 नवंबर को होने वाली है। 4 मामलों में से 2 मामले केंद्रीय और बचे हुए 2 राज्यों से संबंधित है। केंद्रीय मामलों में पहला कैपिटल हिल पर हमला करने से संबंधित है। 6 जनवरी को ट्रंप के समर्थकों ने हिल पर हमला कर दिया और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को मानने से इंकार कर दिया था। दूसरा केंद्रीय मामला क्लासिफाइड डॉक्यूमेंटस से संबंधित है। जिसमें ट्रंप (Donald Trump) पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस से कुछ सरकारी दस्तावेज फ्लोरिडा में स्थित अपने घर मार-ए-लागो में रख लिए थे।

राज्यों मामलों की अगर बात की जाए तो पहला मामला मैनहट्टन में चुप रहने के लिए दिए गए पैसे से संबंधित है। 2 महिलाओं का कहना था कि कई साल पहले ट्रंप (Donald Trump) के साथ उनके संबंध थे लेकिन 2016 के चुनाव से पहले उन्हें चुप रहने के लिए पैसे दिए गए थे। दूसरा मामला जॉर्जिया में 2020 के चुनाव के परिणाम को पलटने की कोशिश से जुड़ा हुआ है।

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क्या कहता है अमेरिका का संविधान ?

अमेरिका का संविधान राज्यों और केंद्र के लिए अलग-अलग तरह से काम करता है। दोनों के लिए अलग नियम लागू होते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय मामलों में ट्रंप (Donald Trump) का अधिक दबाव होगा इसलिए ये मामले को खत्म किया जा सकता है लेकिन राज्य संबंधित मामले ट्रंप के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

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रिकॉर्ड में फेरबदल करने में पाए गए दोषी

मई में मैनहट्टन की एक जूरी ने सेक्स स्कैंडल मामले में ट्रंप को रिकार्ड फेरबदल में दोषी पाया था। इस मामले में 26 नवंबर को सुनाई जानी है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि उनके वकील इसे टालने का अनुरोध कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उनके वकीलों का तर्क हो सकता है कि उन्हें सजा दिए जाने से राष्ट्रपति बनने से जुड़ी प्रक्रिया में देरी हो सकती है और नई सरकार के गठन पर असर पड़ सकता है।

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