Mathura: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर में शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ थी। लोग हरियाली तीज के मौके पर सोने के झूले पर बैठे श्री बांके बिहारी जी महाराज (भगवान कृष्ण) के दर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए थे। पूरे मंदिर को हरे रंग से सजाया गया था। भगवान को भी हरे रंग के कपड़े पहनाए गए थे। झूले के दोनों ओर ‘गोपिका’ की दो प्रतीकात्मक मूर्तियां रखी गई थीं, जिनके साथ ‘चांवर’ (पवित्र चंवर) और ‘पान प्रसाद’ भी था।Mathura:
मंदिर ने झूले के पीछे एक ‘सेज शय्या’ (दिव्य बिस्तर) भी तैयार किया था, जिसमें शीशे और पारंपरिक सौंदर्य प्रसाधन जैसे ‘काजल’ और ‘सिंदूर’ रखे गए थे।माना जाता है कि भगवान शिव को पाने के लिए देवी पार्वती की कठोर तपस्या इसी दिन पूरी हुई थी। ज्योतिषी केशव आचार्य ने बताया कि तपस्या के दौरान उन्होंने केवल बेल के पत्ते खाए थे। Mathura:
‘स्वर्ण हिंडोला’ (सोने के झूले) के महत्व के बारे में मंदिर के ‘सेवायत’ ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा, “इस झूले को मौजूदा जगह पर रखे हुए अब 80 साल हो गए हैं।”इतिहासकार और मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया, “1920 के दशक की शुरुआत में मंदिर के खजाने में लूट हुई थी। तब मंदिर में बचे सोने से झूला बनाने का फैसला किया गया। झूला बनाने की जिम्मेदारी एक सच्चे भक्त हरगु लाल जी को सौंपी गई। उन्होंने बाकी सोना खुद जुटाया।”Mathura:
गोस्वामी ने कहा, “इस झूले को आठ दशक पहले वाराणसी के दो सुनारों ने वृंदावन में एक लाख तोला (1 तोला = 11.66 ग्राम) चांदी और दस हजार तोला सोने से बनाया था।”श्री बांके बिहारी मंदिर हाई-पावर्ड कमेटी के सदस्य रजत गोस्वामी ने बताया कि इस साल झूले की मरम्मत की गई, क्योंकि होली के रंगों के कारण इसका एक हिस्सा खराब हो गया था।
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