Crime News: बिहार में पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की कथित ‘‘न्यायेतर हत्या’’ की जांच के लिए शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का अनुरोध करते हुए कहा गया है कि इस मामले में त्वरित, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भरत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव का रहने वाला था।Crime News
Read Also: UP: बलिया में SDM की सरकारी गाड़ी और पिकअप में जोरदार भिड़ंत, SDM समेत 3 घायल
परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप – कथित मुठभेड़ 17 जून को हुई थी और भरत भूषण तिवारी के परिजनों का दावा है कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारी।बिहार सरकार ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने की शनिवार को घोषणा की थी।’’ Crime News:
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सोमवार को मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध करते हुए न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष उल्लेख किया।पीठ ने उनसे कहा, ‘‘रजिस्ट्रार के समक्ष इसका उल्लेख करें।’’याचिका में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस को दंड देने वाला प्राधिकार नहीं बनने दिया जा सकता, क्योंकि दंड देने की शक्ति केवल न्यायपालिका के पास है।
Read Also: पश्चिम बंगाल बीजेपी सरकार ने पेश किया बजट, डीए में 20 प्रतिशत वृद्धि, एक लाख रिक्तियां…
बिहार में मचा सियासी बवाल – बिहार की घटना का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि इसने पुलिस की कार्यप्रणाली और मुठभेड़ों के दौरान बल प्रयोग को लेकर बहस छेड़ दी है।याचिका में दावा किया गया है, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में न्यायेतर हत्याओं की घटनाएं बढ़ी हैं, जो कानून के शासन के लिए बड़ी चुनौती हैं।’’इसमें ये भी कहा गया है कि हाल के समय में बिहार में पुलिस मुठभेड़ों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत को ‘‘संदिग्ध’’ बताया गया है।
न्यायालय में याचिका दायर- इसमें वर्ष 2014 के उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें पुलिस मुठभेड़ों में मौत या गंभीर चोट के मामलों की जांच के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए गए थे।याचिका में कहा गया है, ‘‘फर्जी मुठभेड़ या पुलिस हिरासत/जेल में आरोपी की मौत अथवा हत्या कानून के शासन को कमजोर करती है। यदि यह कहकर ऐसी हत्याओं को उचित ठहराया जाएगा कि मारा गया व्यक्ति अपराधी था या उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे, तो समाज ‘आंख के बदले आंख’ वाले कानून की ओर बढ़ जाएगा।’’ Crime News:
याचिका में केंद्र सरकार को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय के फैसले में निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित के लिए परामर्श जारी करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।मुठभेड़ में घायल हुए तिवारी की उपचार के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) ले जाते समय मृत्यु हो गई थी।
पुलिस ने भरत भूषण तिवारी को मानसिक अस्वस्थ बताया- मंगलवार को जारी पुलिस के शुरुआती बयान में तिवारी को ‘‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’’ बताया गया था, जबकि उनके परिजनों सहित बाकी लोगों ने उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता बताया, जो लगातार स्थानीय मुद्दों को प्रशासन के समक्ष उठाते थे।पुलिस के बयान के अनुसार, तिवारी ने पुलिस दल पर लगातार गोलीबारी की, जिसके जवाब में ‘‘आत्मरक्षा’’ में की गई जवाबी गोलीबारी में उनके पैर में गोली लगी थी। Crime News
