Delhi: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान सरकार के बीच हुआ यमुना जल परियोजना का ऐतिहासिक MoU

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Delhi: पानी को लेकर दो पड़ोसी राज्यों के बीच का इंतजार अब खत्म हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान सरकार ने यमुना जल परियोजना के एक ऐतिहासिक MoU समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हरियाणा और राजस्थान के बीच दशकों पुराना पानी का विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। दिल्ली में गृह मंत्रालय में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता MoU साइन हुआ है। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे है।Delhi

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वही केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इसे बड़ा कदम बताया है। यह समझौता साल 1994 के ‘अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते’ के तहत किया गया है, जिसके अनुसार अब राजस्थान को उसके हिस्से का पूरा पानी आसानी से मिल सकेगा। इस ऐतिहासिक कदम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल का आभार जताया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “हमारे बुजुर्गों और सनातन संस्कृति ने हमें सिखाया है कि प्यासे को पानी उपलब्ध करवाना हम सबकी सांझी जिम्मेदारी है। इस समझौते से राजस्थान के हमारे भाई-बहनों को पीने का साफ पानी मिलेगा। मैं आदरणीय गृह मंत्री अमित शाह जी और जल शक्ति मंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ कि उनके नेतृत्व में यह ऐतिहासिक फैसला संभव हो पाया है।”

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मानसून के पानी का इस्तेमाल: 1994 के समझौते के तहत जुलाई से लेकर अक्टूबर तक, वर्षा (मानसून) के अतिरिक्त पानी को राजस्थान के लिए पेयजल (पीने के पानी) के रूप में उपलब्ध करवाया जाएगा। वर्षा के इस पानी को हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से आधुनिक पाइपलाइन के माध्यम से सीधे राजस्थान भेजा जाएगा।

इस समझौते से रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं के काम में तेजी आएगी, जिससे जल प्रबंधन को एक नई दिशा मिलेगी। बहरहाल, यह समझौता न केवल दो राज्यों के बीच आपसी सहयोग की एक नई मिसाल है, बल्कि इससे आने वाले समय में राजस्थान के डार्क ज़ोन और पानी की किल्लत से जूझ रहे इलाकों की तस्वीर भी बदलेगी। राज्यों के बीच इस तालमेल से देश में जल प्रबंधन को एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

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