Tundla: उत्तर मध्य रेलवे का बड़ा कारनामा: चिपयाना बुजुर्ग – टूंडला खंड में ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 स्थापित किया

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Tundla: भारतीय रेल के इतिहास में आज एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ‘मिशन रफ़्तार’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तर मध्य रेलवे यानी NCR ने एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसने देश के पूरे रेल नेटवर्क को गर्व करने का मौका दिया है।​देश में पहली बार, 160 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार पर चलने वाली ट्रेनों के लिए अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 का सफल कमिशनिंग कर दिया गया है। यह कारनामा चिपयाना बुजुर्ग से टूंडला खंड के बीच हुआ है। भारतीय रेल अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और हाईटेक होने जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व और प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेन्द्र सिंह के तकनीकी मार्गदर्शन में NCR ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। चिपयाना बुजुर्ग से टूंडला के बीच 175 रूट किलोमीटर के इस खंड पर अब ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 पूरी तरह एक्टिव हो चुका है। Tundla: 

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​इस आधुनिक कवच का सफल परीक्षण कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12033 अप और 12034 डाउन में किया गया। इस ऐतिहासिक कमिशनिंग के बाद उत्तर मध्य रेलवे में कुल कवच वर्ज़न 4.0 का नेटवर्क अब 445 रूट किलोमीटर के एक विशाल स्तर पर पहुँच गया है।​क्यों खास है यह तकनीक?- ​तकनीकी दृष्टिकोण से देखें, तो यह भारतीय रेलवे का इकलौता ऐसा खंड बन गया है जहाँ 160 किलोमीटर प्रति घंटे की हाई-स्पीड पर ‘केर्नेक्स’ (Kernex) मेक के ‘कवच’ वर्ज़न 4.0 को चालू किया गया है। इतना ही नहीं, पहली बार कवच को ‘प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स’ के जरिए ‘हिताची इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ सिस्टम से जोड़ा गया है, जो सिग्नलिंग को पूरी तरह से त्रुटिहीन यानी एरर-फ्री बनाता है। Tundla: 

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​जमीन पर बिछाया गया बड़ा बुनियादी ढांचा: इस सुरक्षा कवच को धरातल पर उतारने के लिए रेलवे की टीम ने इस 175 किलोमीटर के दायरे में 22 एस-टीसीएएस और 9 एलसी-टीसीएएस स्टेशनरी कवच इकाइयाँ लगाई गईं।10 WAP-7 रेल इंजनों को इस तकनीक से लैस किया गया।​ट्रैक पर 4500 से अधिक RFID टैग्स लगाए गए।नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 9 नए, 40-मीटर ऊंचे टावर खड़े किए गए।​और 48-कोर फ़ाइबर ऑप्टिक केबल की मजबूत बैकबोन लाइन बिछाई गई। Tundla: 

​इस सिस्टम को हरी झंडी मिलने से पहले रेलवे की कोर टीम और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता ‘इटालसर्टिफ़ायर’ द्वारा बेहद कड़े परीक्षण किए गए। इस दौरान 10,000 किलोमीटर से ज्यादा की ‘नो-बीआईयू’ (No-BIU) टेस्ट रनिंग की गई।साथ ही, सिग्नलों को अनदेखा करने से रोकने के लिए 180 से ज्यादा ‘स्पैड’ (SPAD) प्रिवेंशन टेस्ट और विपरीत परिस्थितियों में ट्रेनों को टकराने से बचाने के लिए ‘आमने-सामने’ (Head-on) व ‘पीछे से’ (Rear-end) टक्कर रोधी परीक्षण किए गए—जो 100% सफल रहे। इसका सफल परीक्षण देश की प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत, शताब्दी और श्रमशक्ति एक्सप्रेस पर किया जा चुका है।Tundla: 

निश्चित रूप से, देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर संरक्षा और रफ्तार को यह एक नई ऊंचाई देने वाला कदम है। इस कामयाबी पर महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने पूरी तकनीकी टीम, विशेषकर प्रयागराज मंडल और मुख्यालय की टीम को बधाई दी है और इसे ‘मिशन रफ़्तार’ के लिए एक बड़ा कदम बताया है। पूरे रेल परिवार के लिए यह वास्तव में एक गर्व का क्षण है।Tundla: 

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