राजकोषीय घाटे के मानकों का पालन करें राज्य… नीति आयोग रिपोर्ट

New Delhi: States should adhere to fiscal deficit norms... NITI Aayog report

New Delhi: सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग ने बुधवार यानी आज 11 मार्च को राज्यों से राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत राजकोषीय घाटे से संबंधित मानकों का पालन करने का आग्रह किया। इसके लिए व्यय प्रबंधन में अनुशासन, माल और सेवा कर (जीएसटी) आधार बढ़ाने और कर क्षमता बढ़ाने को कहा गया है।

नीति आयोग की ‘राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (एफएचआई) 2026’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन राज्यों का राजस्व घाटा बढ़ रहा है उन्हें अपने राजस्व व्यय को टिकाऊ राजस्व वृद्धि के अनुरूप रखना चाहिए। वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट के मुताबिक, राजकोषीय स्थिति के आधार पर शीर्ष 10 राज्यों में ओडिशा, गोवा, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश शामिल हैं। वहीं बिहार, कर्नाटक एवं तेलंगाना ने मामूली सुधार दर्ज किया जबकि पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल इस सूचकांक में निचले स्थान पर रहे हैं। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश शीर्ष पर रहा। इसके बाद उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय, असम और मिजोरम का स्थान रहा।

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के आर्थिक झटके आते हैं, इसलिए मजबूत राजकोषीय स्थिति बनाए रखना जरूरी है ताकि ऐसे झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय ‘बफर’ उपलब्ध हो।’’ रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों को अपने जीएसटी आधार का विस्तार कर राजस्व जुटाने की क्षमता बढ़ानी चाहिए, सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना चाहिए और पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता सुधारनी चाहिए। इससे घाटे को नियंत्रित करने और कर्ज के स्तर को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। राजकोषीय सेहत सूचकांक में राज्यों की रैंकिंग पांच प्रमुख उप-सूचकांकों के आधार पर की जाती है। इनमें व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाने की क्षमता, राजकोषीय अनुशासन, कर्ज सूचकांक और कर्ज की टिकाऊ स्थिति शामिल हैं।

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