School: मध्य प्रदेश के इन स्कूलों में बच्चों को बनाया जाता है चोर, लुटेरा और जेबकतरा

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School: माता-पिता अपने बच्चे को इसलिए स्कूल भेजते हैं, ताकि वे पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। वे सही-गलत में पहचान कर सकें। अपनी आजीविका चलाने के लिए उन्हें किसी गलत रास्ते का सहारा ना लेना पड़े। आप जानकर चौंक जाएंगे कि मध्य प्रदेश के गांव में ऐसे स्कूल (School) भी है, जो बच्चों को अपराध करने में प्रशिक्षित करते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से हैं ये स्कूल-

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कहां के स्कूलों में किया जाता है प्रशिक्षित-

मध्य प्रदेश के तीन गांव कड़िया, गुल खेड़ी और हुलखेडी में बच्चों अपराधी बनाकर तैयार किया जाता है। इन तीनों ही गांव के बारे में लोगों के पास बहुत कम जानकारी है। यहां पर बच्चों को चोर और डकैत बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। जिसके लिए उनके माता-पिता को सालाना 200,000 से लेकर 300,000 रुपये की फीस भरनी पड़ती है।
गौरतलब है, कि इन स्कूलों (School) में गरीब और कम पढ़ें-लिखें परिवार अपने बच्चों का दाखिला कराते हैं। जिससे बाद में उनका परिवार चोरी के पैसे से अपना जीवन-यापन कर सके। इन स्कूलों में सिखाया जाता है कि कैसे चतुराई से चोरी की जा सकती है और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर कैसे लोग की जेब काट सकते हैं। साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि पुलिस की मार से कैसे बचा जा सकता है।
गिरफ्तारी के समय पुलिस फोर्स रहती है तैनात-
 वहां के पुलिस अफसरों का कहना है कि जब भी किसी अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए जाना होता है तो कई थानों की पुलिस फोर्स साथ मिलकर जाती है। यहां से प्रशिक्षित बच्चे चोरी में इतने माहिर होते हैं कि वे कई बार पुलिस को भी चकमा दे देते हैं। चोरी करने के लिए ये 17 साल तक के बच्चों का सहारा लेते हैं, ताकि उन्हें आने वाले समय के लिए अच्छे से प्रशिक्षित किया जाए।

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विशेष आयोजनों में करते हैं घुसपैठ-
इन स्कूलों (School) से निकलने वाले अपराधी बच्चे होते तो गरीब परिवार से हैं, लेकिन उन्हें अमीरों के साथ घुलने- मिलने की ट्रेनिंग दी जाती है। ये लोग शादी जैसे विशेष आयोजनों में जाकर वहां के लोगों से घुलने-मिलने के साथ ही उनकी जेब पर अपना हाथ साफ कर लेते हैं। कई बार तो ये चोर काफी बड़ी डकैती भी कर लेते हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, इन 3 गांवों के 2000 से ज्यादा लोगों पर 8000 मुकदमे दर्ज है।

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