उच्चतम न्यायालय ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका की खारिज, निर्वाचन आयोग के पास जाना ही एकमात्र उपाय बताया

Delhi:  

Delhi:  उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी याचिका नामंजूर कर दी।न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।Delhi:  

पीठ ने कहा, ‘‘यदि अदालत यह तय करने लगे कि किन मामलों में नामांकन रद्द किया जाना इतना गलत है कि वह सीधे अनुच्छेद 32 या 226 के तहत हस्तक्षेप कर सकती है और किन मामलों में उम्मीदवार को चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना चाहिए, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 329 में ऐसी व्यवस्था जोड़ रही होगी जो वहां लिखी ही नहीं गई है।’

Read Also: Delhi: प्रधानमंत्री मोदी ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की

उसने कहा, ‘‘हमें डर है कि ऐसी किसी भी व्याख्या को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता, जिसके तहत कुछ मामलों में यह अदालत हस्तक्षेप करे और कुछ अन्य मामलों में पक्षकारों को चुनाव न्यायाधिकरण का सहारा लेने के लिए छोड़ दे।’भारतीय संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव संबंधी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है, ताकि न्यायिक देरी के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।सुनवाई के दौरान उच्चतम अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता। Delhi:  

Read Also:Haryana: CM सैनी ने सैनी समाज के विशाल महासम्मेलन में की बतौर मुख्य अतिथि शिरकत

न्यायालय ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो।पीठ ने कहा, ‘‘निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यतः इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है। क्या इस न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो?’मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो। Delhi:  

उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे।सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया।राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया।मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है।

Top Hindi News, Latest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi Facebook, Delhi twitter and Also Haryana Facebook, Haryana Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *